पांकी में फर्जी इलाज का खेल, लापरवाही से महिला की गई जान, जिम्मेवार कौन?

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Panki Palamu News (JKJ News) : नमस्कार मैं, शत्रुध्न कुमार सिंह, भारत देश का एक सामान्य इंसान, मुझे एक बात समझ नहीं आता है कि भारत देश का हमेशा से एक ही पहलू क्यों दिखाया जाता है।

कहा जाता है कि भारत बहुत विकसित हो गया, काफी आगे बढ़ गया है,लेकिन सच यह है कि भारत विकसित हुआ की नहीं हुआ किंतु भारत के राजनेता जरूर विकसित ओर धनवान हो गए हैं,भारत के राजनेताओं को केवल अपना दिन और पीढ़ियाँ सुधारनी हैं, अपने बेटे को महाराज बनाना है और अपनी बहु को महारानी, गरीब और आम जनता की तो किसी को कुछ परवाह नहीं है चाहे वह खाली पेट सो रहे हो या गरीबी से तराह काट कर, या फिर बिना पैसों के हॉस्पिटल में रो रो कर, भारत देश का एक पहलू और है वो है गरीबी, जिसमें पीसकर हमारे देश की महिलाओं का आए दिन शोषण का शिकार होना पड़ता है।

नेता के लिए प्राइवेट जेट और अपोलो हॉस्पिटल

गरीबी से त्रस्त जनता की ना तो किसी उच्च नेता को चिंता है और ना ही उनके ग्रामीण जनप्रतिनिधि को। वे बस केवल अपनी A/C गाड़ियों में घूमते रहते हैं और अपने रोजगार व्यापार को बढ़ाने में लगे रहते हैं। लेकिन कभी किसी राजनेता ने अपने गरीब मतदाताओं, जिनके कारण उन्हें राजनीतिक पद मिला, उनके दुख-सुख की परवाह नहीं करते हैं,बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आज हमारे “विकसित भारत” की विडंबना यह है कि एक राजनेता का इलाज दुनिया के बेस्ट डॉक्टर करते हैं, उन्हें तत्काल प्राइवेट जेट से दिल्ली के अपोलो जैसे बड़े अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है। जनता के टैक्स के पैसों पर इलाज कराया जाता है।

 

वहीं गरीब जनता, जिसने अपना अमूल्य वोट देकर उन्हें नेता बनाया, ओर सत्ता के राजगद्दी पर बैठाया वही राजनेता सत्ता में आने के बाद अपने लोगों को आम जनता को भूल जाता है कि उन्होंने उसे सत्ता में क्यों लाया है

 

गरीब इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खाता है, गिड़गिड़ाता है रोता है बिलखता है यहाँ तक कि अपनों को खो देता है।

यह स्थिति क्यों बनी?

किस कर्म से यह विषमता उत्पन्न हुई कि एक वर्ग को तो बेहतर इलाज की हर सुविधा मिले और दूसरे को अस्पताल में बेड तक नसीब न हो? यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि स्वतंत्र भारत में भी कालाबाजारी और घूसखोरी ने भारत को पूरी तरह जकड़ रखा है। जिस भारत में गरीबों का कल्याण होना चाहिए था, वही उनका शोषण किया जा रहा है उन्हें बेहतर रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए थी, परंतु गरीबों को इनमें से कुछ भी लाभ नहीं मिल पा रहा।

झारखंड के पलामू जिले के पांकी का मामला इसका ताजा उदाहरण है। जितेंद्र भुइयाँ, जो दलित समाज से आते हैं, पैसे की कमी और गरीबी की वजह से अपनी पत्नी पूनम देवी का इलाज किसी अच्छे अस्पताल में नहीं करा पाए। मजबूरी में उन्होंने पांकी के ही एक फर्जी अस्पताल, सेमी सेवा सदन में पथरी का इलाज कराया। इलाज के दौरान पूनम देवी की मृत्यु हो गई। यह घटना अत्यंत दुखद है। सोचिए, जिस परिवार की नवयुवक महिला की मृत्यु हो गई, जिसने अभी तक अपने बच्चों को सही से पालन पोषण भी नहीं किया था, उस परिवार पर क्या बीत रही होगी। लेकिन शर्म की बात है कि हमारे देश के वे नेता, जो लंबी-लंबी गाड़ियों के काफिलों में चलते हैं, ऐसे गरीब परिवारों के दुख-दर्द में खड़े होने तक नहीं आते।

पूरी रात सड़क पर धरना-प्रदर्शन

शनिवार की इस घटना के बाद पीड़ित परिवार के लोग पूरी रात सड़क पर धरना-प्रदर्शन करते रहे। उनके साथ ग्रामीण जनता, पांकी विधानसभा की फाइटर मंजूलता और समाजसेवी नेता मिथिलेश पांडे भी धरना पर बैठे रहे और प्रशासन से उचित मुआवजे, न्याय और डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग करते रहे। लेकिन पूरी रात किसी भी उच्च दर्जे के राजनेता ने अपने A/C कमरों से निकलकर पीड़ित परिवार से मिलने आना उचित नहीं समझा।

क्योंकि रात्रि का माहौल था लेकिन आप किस बात के राजनेता हैं जो उनके दुख में समय पर न पहुंचे लगता है शायद इसलिए नहीं पहुंचे कि वह परिवार गरीब दलित समाज से आता है और छोटे ग्रामीण क्षेत्र का है। लेकिन नेताओं को यह समझना चाहिए कि जनता ही उन्हें सत्ता में बैठाती है और वही जनता उन्हें सत्ता से गिरा भी सकती है। जनता ने विश्वास करके उन्हें चुना, लेकिन वे जनता के एक भी दुख-सुख में साथ नहीं खड़े हुए। आने वाला समय तय करेगा कि जनता उनके साथ क्या करेगी।
पांकी विधानसभा की जनता और गरीब परिवार यह जरूर तय करेंगे कि उनके विश्वास का परिणाम भविष्य में किसे मिलेगा।

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