Tiger Jairam Mahto और Kurmi Protest के खिलाफ आदिवासियों का प्रदर्शन

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Tiger Jairam Mahto (JKJ News) : कुड़मी समाज का st में शामिल होना के लिए आंदोलन के खिलाफ आदिवासियों ने रामगढ़ जिले में आक्रोश प्रदर्शन किया। उस दौरान उन्होंने एक टाइगर को उल्टा लटका कर क्षेत्र भ्रमण किया और आक्रोश जताते हुए कहा कि यह टाइगर नहीं टाइगर जयराम महतो है।

उन्होंने आगे कहा कि टाइगर शुगर, बैल, बकरी को शिकार करता है पर आदिवासी टाइगर का शिकार करता है। और हम लोग टाइगर का शिकार करेंगे। उन्होंने कहा कि टाइगर जयराम महतो जानवर जैसा बात करता है। उसका हम लोग शिकार करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर कुड़मी समाज आदिवासी में आते हैं तो हम तेल में छान कर नहीं कांचे खा जाएंगे। उन्होंने कहा कि जयराम महतो डुमरी के विधायक हैं लेकिन अक्ल नहीं है बोलने का। भले ही वह अपना नाम टाइगर रख लिया हो वह शुगर का शिकार करता होगा। तो हम आदिवासी लोग टाइगर का शिकार करते हैं।

कुड़मी समाज के आंदोलन के खिलाफ आदिवासी समाज आक्रोश प्रदर्शन कर रहे हैं वह झारखंड में उग्र हो गया है। इतना ही नहीं लोगों का कहना है कि कुड़मी महतो को आदिवासियों से कोई लगाव या प्यार नहीं है। सिर्फ उन्हें आरक्षण चाहिए आरक्षण के लिए वह आदिवासी बनना चाहते हैं। उन्हें आदिवासी बनने का सिर्फ लोभी है। कुछ दिन पहले रेल टेका आंदोलन हुआ था उसमें तिवारी महतो ने कहा था कि हम असली आदिवासी हैं। हम लोगों ने रेल रोक दिया है तो आदिवासी क्या किया है अभी तक।

कुड़मी समाज को आरक्षण मिलने से आदिवासी के बच्चे का भविष्य खतरे में

आंदोलन कर रहे आदिवासियों ने आगे कहा कि झारखंड में आदिवासी और कुड़मी में समाज को लड़वाने का काम कर रहा है यह लोग। अगर कुर्मी समाज के लोग आदिवासी बन जाते हैं तो हमारे बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा। यह आरक्षण बढ़ जाएगा। कल जो हमें घिन नजर से देख रही थे। आज वह क्यों आदिवासी बनना चाह रहा है यह साफ नजर आ रहा है। आदिवासियों ने आगे कहा कि हमें पहले कुड़मी समाज अपने जगह पर पानी पीने से रोक रहा था। प्रदर्शनकारी ने आगे कहा कि आदिवासी लोगों को जो घिनन नजर से देख रही थी। वह महतो समाज आदिवासी बनने के लिए खोज रही है।

Jairam Mahato का आदिवासी नहीं देंगे साथ

आदिवासियों ने आगे कहा कि कुर्मी समाज में जब भी किसी प्रकार का कार्यक्रम या प्रोग्राम होता था तो उनके घर से आदिवासी समाज को निमंत्रण जाता था तो आदिवासी लोग वहां पर जाते थे। जिस जगह पर लोग पेशाब करते थे थूकते थे वहां पर आदिवासी लोग को बैठना पड़ता था। वहीं पर बैठकर खाना खिलाया जाता था। आज वही कुड़मी समाज हमारा आदिवासी समाज में आना चाहता है क्योंकि सिर्फ उन्हें आरक्षण चाहिए आरक्षण के लालच में वह आदिवासी बनना चाहते हैं कुर्मी समाज के कई विधायक हैं तो उनके दिमाग में कहीं ना कहीं या मनसा होगा कि उनके समाज का लोग मुख्यमंत्री बनेगा। पहले वह लोग 1932 खतियान का बात करते थे स्थानीय नीति का बात करते थे। लेकिन आज उनके मन में लालच आ गया है।

जयराम महतो एक सीट जीत लिया तो उसको लगता है कि सारा कुर्मी समाज उसको ही समर्थन देगा। जबकि हम लोग आदिवासी चाहते हैं कि जयराम महतो आगे बढ़े। लेकिन अब कतई उसको आगे नहीं बढ़ने देंगे। चाहे चंद्रप्रकाश चौधरी हो या AJSU प्रमुख सुदेश महतो हो। अब सब का विरोध आदिवासी समाज करेगा

टाइगर को उल्टा लटका दिया गया

वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस तरह से आदिवासियों ने टाइगर को उल्टा लटका दिया है। और उन लोगों का कहना है कि यह जयराम महतो को उल्टे लटकाए हुए हैं। उन्होंने टाइगर को उल्टा लटकाया है। बोल रहे हैं कि कुड़मी समाज आदिवासी बनना चाहते हैं। इसलिए उनका आक्रोश है। आज रामगढ़ मैदान में जमा हुए आदिवासी समाज के लोग डीसी ऑफिस तक पैदल मार्च करके जाएंगे। यहां पर लाखों लोग हैं जो पैदल मार्च करके इसरो विरोध कर रहे हैं। ताकि कुड़मी समाज को आदिवासी में शामिल नहीं किया जाए। कुछ दिन पहले रेल टेका डहर छेका आंदोलन हुआ था। जिसमें कुड़मी समाज रेल रोक रही थी। और मांग कर रही थी कि उन्हें आदिवासी में यानी ST में शामिल किया जाए। पर यहां जो आक्रोश प्रदर्शन हो रहा है उसमें कुर्मी समाज के आंदोलन से भी ज्यादा भीड़ लगा है।

वहीं एक आदिवासी महिला से पत्रकार ने पूछा कि कुड़मी पहले आदिवासी थे तो कुछ गलती के चलते उनको आदिवासी समाज से हटा दिया गया था। तो इस पर महिला ने कहा कि आज भी बहुत सारे ऐसे गांव है जहां पर चंपाकल हो जहां वहां पर कुड़मी मां-बहन पानी भरते हैं और आदिवासी समाज के लोग भी पानी भरते हैं अगर आदिवासी पहले पानी भर ले तो कुड़मी उस चंपा कल को लगातार 10 बार धोएंगे तब जाकर खुद से पानी भरेंगे। अगर कुर्मी समाज के लोग पानी भर रहे हैं और गलती से आदिवासी समाज के महिला वहां पर पहुंच जाए और पानी भरने लगे तो महतो समाज के लोग आदिवासी समाज को घिन नजर से देखते हैं। उनका कहनाम रहता है कि पानी में हवा लग गया है आदिवासी आदिवासी लगेगा।

कुड़मी समाज अपने बहन बेटी को दे

आगे आदिवासी महिला ने कहा कि अगर कुड़मी समाज को आदिवासी बनना है, अगर उन्हें आदिवासी बनना पसंद है तो वह अपने बहन बेटियों को हमें दें हमारे साथ रिश्ता जोड़े। हम उनके बहन बेटियों को अपने गले से लगा कर रखेंगे। लेकिन यह लोग ऐसा नहीं करेंगे। ये लोग एक साथ खाना तो दूर की बात है पानी की छिट पड़ जाए तो यह लोग पी नहीं सकते हैं। इन लोगों का कहनाम है कि वह सब बड़े जाति के लोग हैं और हम लोग छोटे जाति के लोग हैं। हम लोग को वह घिन नजर से देखा करते हैं। उन लोगों को आदिवासी से प्रेम नहीं है सिर्फ आरक्षण लेने के लिए यह सब कर रहे हैं। क्योंकि आरक्षण से उन्हें नौकरी मिलेगी।

महिला ने आगे कहा कि जल जंगल जमीन हमारे संपत्ति है। हम आदिवासी की संपत्ति है और इस संपत्ति पर अगर इन्होंने आंख उठाए तो हम महिला लोग भी अगर घर में थोड़ी ना बैठेंगे चूड़ी पहनकर। अगर हम चूड़ी पहनते हैं तो इस हाथ में औजार उठाने का भी काम करते हैं।

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