कर्पूरी ठाकुर ने शोषितों के लिए किया आजीवन संघर्ष : Shashi Bhushan Mehta

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कर्पूरी ठाकुर ने शोषितों के लिए किया आजीवन संघर्ष : Shashi Bhushan Mehta

 

Shashi Bhushan Mehta पांकी / पलामू (JKJ News)। राष्ट्रीय नाई महासभा के तत्वावधान में पांकी स्थित कर्पूरी चौक पर भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाई गई। जयंती समारोह के मुख्य अतिथि पांकी विधायक डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता तथा विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय नाई महासभा के जिला अध्यक्ष प्रो. बच्चन ठाकुर थे।

इस अवसर पर विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता ने जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर गरीबों, पिछड़ों और वंचित वर्गों की सशक्त आवाज़ थे। जनता से उनके गहरे जुड़ाव और सरल व्यक्तित्व के कारण ही उन्हें “जननायक” की उपाधि मिली। स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक और कुशल राजनेता के रूप में उन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया। उनकी इसी जनसेवा भावना को सम्मान देते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया।

बच्चन ठाकुर ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर एक विचारधारा थे

विशिष्ट अतिथि प्रो. बच्चन ठाकुर ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। उन्होंने जीवनभर दबे-कुचले, शोषित और पीड़ित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अंग्रेज़ी की अनिवार्यता समाप्त की, भले ही इसके लिए उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। किसानों को राहत देते हुए गैर-लाभकारी भूमि पर मालगुजारी कर समाप्त किया तथा सरकारी नौकरियों में पिछड़ों और गरीबों को आरक्षण दिया।

उन्होंने कहा कि लंबे राजनीतिक जीवन के बावजूद कर्पूरी ठाकुर के पास न तो कोई निजी संपत्ति थी और न ही पक्का मकान। सादगी, ईमानदारी और जनसेवा ही उनकी पहचान रही। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया, जिससे आज की पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए

मौके पर पहुंच पांकी विधायक डॉक्टर शशी भूषण मेहता ने कहा

इस अवसर पर विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता ने बताया कि विधायक कोटे की राशि से कर्पूरी ठाकुर की स्मृति में कर्पूरी भवन का निर्माण कराया जा रहा है। नाई समाज के लोगों ने कार्यस्थल पर पहुंचकर विधायक के प्रति आभार जताया।

कार्यक्रम का संचालन प्रखंड अध्यक्ष विजय ठाकुर ने किया। मौके पर जिला उपाध्यक्ष अमलेश ठाकुर, एलआईसी अभिकर्ता विनोद ठाकुर, विधायक प्रतिनिधि राजेंद्र यादव, मिंटी वर्मा, जिला सांसद प्रतिनिधि ललित मेहता, सांसद प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह, संजय ठाकुर, सुनील ठाकुर, पिंटू ठाकुर, मनातू प्रखंड अध्यक्ष श्रवण ठाकुर, संतु ठाकुर, कमेश ठाकुर, कृष्णा ठाकुर, रामेश्वर ठाकुर सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

 

झारखंड: पलामू के कोनवाई गांव में सरस्वती पूजा के बाद आयोजित ज्ञान मेला, हजारों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

झारखंड के पलामू जिले के कोनवाई गांव में सरस्वती पूजा के एक दिन बाद आयोजित होने वाला प्रसिद्ध ज्ञान मेला इस वर्ष भी भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।

पूरे पलामू जिले में “ज्ञान मेला” के नाम से मशहूर यह मेला हर वर्ष आस्था और परंपरा का केंद्र बनता है। मेले में विभिन्न सरस्वती पूजा समितियों द्वारा तैयार की गई अत्यंत सुंदर, आकर्षक और भव्य झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

इन झांकियों में मां सरस्वती के साथ-साथ रामायण, महाभारत और अन्य धार्मिक प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। झांकियों के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में कोनवाई गांव पहुंचे।

सैकड़ो पूजा समितियां ने लिया भाग

ज्ञान मेला में सैकड़ों पूजा समितियों ने भाग लिया और अपनी-अपनी झांकियों का प्रदर्शन किया। झांकी प्रतियोगिता के तहत सर्वश्रेष्ठ झांकी को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। हालांकि झांकियों की संख्या और उनकी भव्यता को देखते हुए निर्णायक मंडल के लिए सर्वश्रेष्ठ झांकी का चयन करना आसान नहीं था।

इस अवसर पर ज्ञान मेला के मुख्य अतिथि पूर्व पांकी विधानसभा विधायक प्रत्याशी लाल सूरज उपस्थित रहे। वहीं प्रखंड एवं अंचल अधिकारी ललित प्रसाद सिंह भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

मेले के सफल आयोजन में ज्ञान मेला समिति के अध्यक्ष बृजदेव सिंह सहित अरविंद कुमार सिंह, छातन सिंह, बिट्टू पासवान, अनिल कुमार सिंह, सत्येंद्र कुमार सिंह, योगेंद्र कुमार सिंह, जगनारायण प्रसाद सिंह, बाबूलाल सिंह, रामबली सिंह, विजय सिंह, देवराज राम, हरमन सिंह, शैलेंद्र कुमार सिंह और संतोष कुमार सिंह सहित कई सदस्यों की अहम भूमिका रही।

कुल मिलाकर, कोनवाई गांव का यह ज्ञान मेला श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा, जहां आस्था के साथ-साथ कला और रचनात्मकता की भी अनूठी झलक देखने को मिली।

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