अभिषेक सिंह के कलम से
Palamu Panki News (JKJ News) : पलामू जिले के पांकी प्रखंड में रविवार को हुए एक विवाद ने सोमवार तक सामाजिक तनाव का रूप ले लिया। उकसु बरवाडीह में आयोजित यज्ञ कार्यक्रम के समापन के दिन दो जातीय समुदायों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि उसका असर पांकी मुख्य चौक तक पहुंच गया। इस दौरान बनखेता निवासी समाजसेवी नरेंद्र सिंह पर कथित रूप से जानलेवा हमला कर दिया गया, जिसके बाद धानुक समाज में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार को उकसु बरवाडीह में एक धार्मिक यज्ञ का समापन कार्यक्रम आयोजित था। कार्यक्रम के दौरान या उसके तुरंत बाद किसी कारणवश दो जातीय समूहों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते-देखते विवाद में बदल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि बात इतनी बढ़ गई कि एक पक्ष के लोग आक्रोशित होकर गुट बनाकर उकसु गांव से पांकी की ओर निकल पड़े।
बताया जाता है कि करीब बीस से अधिक लोग लाठी-डंडों से लैस होकर पांकी मुख्य चौक की ओर बढ़े। इसी दौरान पांकी मुख्य चौक पर पान की दुकान के पास खड़े बनखेता निवासी और समाजसेवी नरेंद्र सिंह को उन्होंने निशाना बना लिया। आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूछताछ या पहचान के ही घेर लिया गया और उन पर हमला कर दिया गया।
घायल नरेंद्र सिंह ने क्या कहा?
घायल नरेंद्र सिंह ने बताया कि वे पांकी मुख्य चौक स्थित एक पान दुकान पर सामान्य रूप से खड़े थे। उसी समय उकसु गांव के भूमिहार समाज के कुछ लोग लाठी-डंडों के साथ वहां पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन लोगों ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए भद्दी-भद्दी गालियां दीं। जब उन्होंने स्थिति को समझने और पूछने का प्रयास किया कि आखिर मामला क्या है, तब तक उन पर अचानक हमला कर दिया गया।
नरेंद्र सिंह के अनुसार, लगभग बीस से अधिक लोगों ने मिलकर उन पर लाठी-डंडों से वार किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने किसी तरह अपनी जान बचाने की कोशिश की और बाद में सीधे थाना पहुंचे। उनका कहना है कि घटना के बाद हमलावर पक्ष के लोग भी थाने पहुंच गए।
दोनों पक्षों ने दिया आवेदन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पांकी थाना में दोनों पक्षों की ओर से लिखित आवेदन दिया गया है। पांकी थाना प्रभारी राजेश रंजन ने बताया कि दोनों तरफ से शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के आधार पर दोषियों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं होने से धानुक समाज में नाराजगी बनी हुई है।
धानुक समाज का फूटा आक्रोश
इस घटना को लेकर धानुक समाज में भारी रोष देखा जा रहा है। समाज के अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह ने इस घटना को “निर्दोष व्यक्ति पर जानलेवा हमला” बताते हुए कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि बनखेता निवासी नरेंद्र सिंह का विवाद से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी उन्हें निशाना बनाया गया, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि पूरे धानुक समाज में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश और आवेश है। उनका कहना है कि बिना किसी वजह के किसी निर्दोष व्यक्ति पर हमला करना कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की।
सड़क पर उतरा समाज
इसी मांग को लेकर धानुक समाज के महिला, पुरुष और युवक बड़ी संख्या में सड़क पर उतरे। लोगों ने चट्टानी एकता का परिचय देते हुए प्रदर्शन किया और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने पांकी पुलिस को एक मांग पत्र भी सौंपा, जिसमें 48 घंटे के अंदर गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की मांग की गई है। समाज के नेताओं ने कहा कि यदि समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो पांकी बंद, चक्का जाम और बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा।
सुरेन्द्र सिंह ने कहा, “हम शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग कर रहे हैं। लेकिन यदि दोषियों को बचाने की कोशिश की गई या कार्रवाई में देरी हुई तो पूरा धानुक समाज एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करेगा। हम यह दिखा देंगे कि समाज अन्याय बर्दाश्त नहीं करेगा।”
पुलिस का आश्वासन
मामले को गंभीरता से लेते हुए पांकी पुलिस ने समाज के प्रतिनिधियों को 48 घंटे के भीतर दोषियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है। थाना प्रभारी ने कहा कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है, लेकिन पुलिस प्रशासन हालात पर नजर रखे हुए है। स्थानीय लोगों की नजर अब पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है कि क्या तय समय सीमा के भीतर गिरफ्तारी होती है या नहीं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छोटी सी चिंगारी किस तरह सामाजिक तनाव में बदल सकती है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कदमों और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।
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