पांकी प्रखंड में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: 250 किसानों को जैविक उर्वरक उत्पादन हेतु ड्रम वितरित
शत्रुध्न सिंह/ JKJ NEWS

पलामू जिले के पांकी प्रखंड में प्राकृतिक खेती को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। दिनांक 14 फरवरी 2026 को पांकी अंश बीआरसी (BRC) परिसर में जिला स्तर से आए अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की उपस्थिति में चयनित 250 किसानों के बीच जैविक उर्वरक उत्पादन के लिए ड्रम का वितरण किया गया। यह कार्यक्रम किसानों को रासायनिक खेती से मुक्त कर प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धति की ओर अग्रसर करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
इस अवसर पर जिला कार्यालय से आजीविका प्रबंधक अवकाश सर, जिला एमआईएस प्रबंधक मिथलेश सर, लाइवस्टॉक प्रबंधक शेखर सर तथा जिला उद्यान पदाधिकारी सूरज सर विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त गढ़वा जिले से झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसायटी (Jharkhand State Livelihood Promotion Society – JSLPS) के जिला वित्तीय प्रबंधक एवं जिला एमआईएस प्रबंधक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। साथ ही ‘प्रदान’ संस्था (PRADAN) से प्रिंस सर एवं लंकेश सर की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक सशक्त बनाया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्राकृतिक खेती के महत्व पर विस्तारपूर्वक चर्चा से हुई। अधिकारियों ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में लगातार रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता में गिरावट आई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ी है और किसानों की आय प्रभावित हुई है। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की सेहत को सुधारती है, बल्कि कम लागत में अधिक टिकाऊ उत्पादन सुनिश्चित करती है। इसी उद्देश्य से 250 चयनित किसानों को जैविक उर्वरक तैयार करने हेतु विशेष ड्रम प्रदान किए गए, ताकि वे घर पर ही जीवामृत, घनजीवामृत, जैविक घोल और अन्य प्राकृतिक उर्वरकों का निर्माण कर सकें।

अवकाश सर ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि इस पहल से किसानों की लागत घटेगी, भूमि की गुणवत्ता में सुधार होगा और उपज की गुणवत्ता बेहतर होगी, जिससे बाजार में भी बेहतर मूल्य प्राप्त किया जा सकेगा।
एमआईएस प्रबंधक मिथलेश सर ने किसानों को योजना के क्रियान्वयन, डेटा संधारण और निगरानी की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चयनित सभी 250 किसानों की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें प्रशिक्षण और संसाधनों का पूरा लाभ मिल रहा है। लाइवस्टॉक प्रबंधक शेखर सर ने पशुपालन और प्राकृतिक खेती के आपसी संबंध को स्पष्ट करते हुए बताया कि गोबर और गौमूत्र जैसे संसाधन प्राकृतिक उर्वरक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे खेती और पशुपालन दोनों को एकीकृत कर आय के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
जिला उद्यान पदाधिकारी सूरज सर ने उद्यानिकी फसलों में प्राकृतिक उर्वरकों के उपयोग के लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फल एवं सब्जी उत्पादन में जैविक उर्वरकों के प्रयोग से उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर होती है और उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद प्राप्त होते हैं। इससे किसानों को जैविक बाजारों में बेहतर पहचान और मूल्य मिल सकता है।
गढ़वा जिले से आए JSLPS के जिला वित्तीय प्रबंधक ने योजना के वित्तीय पक्ष पर चर्चा करते हुए बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने किसानों को प्रोत्साहित किया कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपने गांवों में प्राकृतिक खेती का मॉडल विकसित करें।
‘प्रदान’ संस्था के प्रतिनिधि प्रिंस सर एवं लंकेश सर ने किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में चयनित किसानों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें जैविक घोल तैयार करने की विधि, फसल प्रबंधन, कीट नियंत्रण और विपणन से संबंधित पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में प्रखंड स्तर से FTC सर तथा सभी CC (कम्युनिटी कोऑर्डिनेटर) एवं PRP (प्रोजेक्ट रिसोर्स पर्सन) उपस्थित रहे। इनकी भूमिका किसानों तक जानकारी पहुंचाने और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण है। अधिकारियों ने सभी फील्ड स्टाफ को निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से किसानों के खेतों का निरीक्षण करें और आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करें।
कार्यक्रम के दौरान कई किसानों ने अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं और प्राकृतिक खेती से जुड़ी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया। कुछ किसानों ने बताया कि वे पहले से सीमित स्तर पर जैविक विधियों का प्रयोग कर रहे थे, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण बड़े स्तर पर इसे लागू नहीं कर पा रहे थे। ड्रम वितरण से उन्हें अब जैविक उर्वरक तैयार करने में सुविधा होगी।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने आशा व्यक्त की कि पांकी प्रखंड प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में एक मॉडल के रूप में उभरेगा। यदि 250 चयनित किसान सफलतापूर्वक जैविक उर्वरक उत्पादन और प्राकृतिक खेती को अपनाते हैं, तो अन्य किसान भी प्रेरित होंगे और पूरे क्षेत्र में इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा।
इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती भी मिलेगी। पांकी प्रखंड में आयोजित यह कार्यक्रम प्राकृतिक खेती की दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का आधार बनेगा।




