
शत्रुध्न कुमार सिंह/ JKJ NEWS
Panki Rain Havoc (JKJ News) : पांकी प्रखंड अंतर्गत बनखेता गांव में रविवार की देर रात एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा सामने आया। रात के लगभग दो बजे बरसात के कारण बंखेता गांव निवासी सौरभ कुमार सिंह पिता भुनेश्वर सिंह का मिट्टी-खपरैल से बना घर बरसात की वजह से अचानक रात्रि में ढह गया, और उस समय उनका पूरा परिवार उसी घर में सो रहा था, परिवार के सदस्यों को ज्यादा जान माल नुकसान नहीं हुआ है और समय रहते पूरा परिवार घर से आनन फानन में अपनी जान बचाकर घर से बाहर निकल गए , घर की दीवारें पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और उस घर में दुबारा रहना मौत के मुंह में रहने के बराबर है, इस घटना से उनका पूरा परिवार खुले आसमान तले आ गया।

ग्रामीणों ने बताया कि जिस घर में पूरा परिवार रह रहा था, वही उनका आशियाना था। परिवार का रहना, खाना, बच्चों और बुजुर्गों का सोना – सब कुछ उसी घर पर निर्भर था। लेकिन अब घर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। बरसात के इस मौसम में परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर पर छत की है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को रात में खुले में रहना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ गए हैं।
ना अबुआ आवास और ना प्रधानमंत्री आवास मिला अब तक
स्थानीय लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवार को अब तक न तो प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है और न ही राज्य सरकार की अबुआ आवास योजना का। यदि समय पर इन योजनाओं का लाभ मिला होता, तो शायद परिवार आज ऐसी स्थिति में न होता। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि आपदा राहत कोष से तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए और स्थायी आवास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। लोगों ने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सार्थक होंगी जब जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचें।

जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मदद की गुहार
सौरभ कुमार सिंह ने भी प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि उनका पूरा परिवार बेसहारा हो गया है। बरसात के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों के साथ खुले में जीवन-यापन करना बेहद कठिन हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि जिला प्रशासन तुरंत राहत पहुंचाए और आवास उपलब्ध कराए। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। हर साल बरसात के मौसम में पांकी प्रखंड के कई गांवों में पुराने और जर्जर घर गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। लेकिन पीड़ित परिवारों को समय पर मदद नहीं मिल पाती। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है। फिलहाल, बंखेता गांव का यह परिवार सरकारी मदद की आस में है और गांव के लोग भी चाहते हैं कि प्रशासन तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाए।




