Ranchi News : धार्मिक झंडा उखाड़े जाने पर हंगामा, घंटो सड़क जाम

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Ranchi News (JKJ News) । ईद मिलादुन्नबी (12 रबी-उल-अव्वल) के मौके पर पिथोरिया थाना क्षेत्र के सोसो चौक पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। जुलूस-ए-मोहम्मदी की तैयारी के बीच लगाए गए धार्मिक झंडों में से कुछ अज्ञात तत्वों द्वारा उखाड़ दिए गए। इस घटना से लोगों में गुस्सा फैल गया और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग चौक पर इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे।

ग्रामीणों का आरोप – धार्मिक झंडा उखाड़ कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश

ग्रामीणों ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी 12 रबी-उल-अव्वल पर जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला जाना था। यह जुलूस बाहर कहीं नहीं जाता, बल्कि गांव और मोहल्ले की गलियों में ही निकाला जाता है। इसी क्रम में सोसो चौक पर 10-12 धार्मिक झंडे लगाए गए थे। सुबह लगभग 6 बजे स्थानीय लोगों ने देखा कि कुछ झंडे उखाड़ कर फेंक दिए गए हैं।

लोगों का कहना है कि यह काम पूरी तरह से माहौल बिगाड़ने की नीयत से किया गया है, ताकि आपसी भाईचारे में दरार डाली जा सके। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी जानकारी प्रशासन को दी और खुद भी मोबाइल से तस्वीरें खींच लीं।

डॉक्टर मुकेश के सीसीटीवी फुटेज पर विवाद

ग्रामीणों ने दावा किया कि पास की बिल्डिंग, जो डॉक्टर मुकेश की है, उसमें सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। एक कैमरा गांव के रास्ते पर और दूसरा हाईवे की ओर है। घटना उसमें कैद हो चुकी है। लेकिन जब ग्रामीणों ने फुटेज दिखाने की मांग की, तो डॉक्टर मुकेश ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि रात 8 बजे के बाद कैमरे बंद रहते हैं।

ग्रामीणों को शक है कि जब कैमरे लगे हैं तो उन्हें रात भर चालू रहना चाहिए। उनका आरोप है कि कैमरा बंद करने का बहाना बनाकर सच को छिपाने की कोशिश की जा रही है। कुछ ग्रामीणों ने तो यहां तक आरोप लगाया कि यह पूरी घटना एक साजिश के तहत की गई है और इसमें डॉक्टर मुकेश की भूमिका हो सकती है।

महिलाओं का गुस्सा – जान देने और जान लेने तक को तैयार

घटना से आक्रोशित महिलाओं ने भी मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि हमारे धार्मिक प्रतीक का अपमान हुआ है और यह किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा कि “अगर जरूरत पड़ी तो हम जान भी दे सकते हैं और जान ले भी सकते हैं। हजरत मोहम्मद मुस्तफा की शान में गुस्ताखी करने वालों को किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा।”

महिलाओं का कहना था कि अगर डॉक्टर मुकेश निर्दोष हैं तो उन्हें सीसीटीवी फुटेज दिखाने में क्या परेशानी है? फुटेज छुपाना साफ तौर पर साजिश की तरफ इशारा करता है।

सड़क जाम और प्रदर्शन, टायर जलाकर जताया विरोध

घटना के बाद सैकड़ों की संख्या में लोग सोसो चौक पर जमा हो गए। गुस्साए लोगों ने सड़क पर बैठकर जाम लगा दिया और टायर जलाकर विरोध जताया। चौक पर दोनों ओर से रास्ता बंद कर दिया गया। लोग नारेबाजी करते रहे और प्रशासन से मांग करते रहे कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वे जाम नहीं हटाएंगे।

ग्रामीणों की मांगें

  1. जिसने भी धार्मिक झंडे उखाड़े हैं, उसकी तुरंत पहचान कर गिरफ्तारी की जाए।
  2. डॉक्टर मुकेश के घर के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएं।
  3. माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो।
  4. भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए प्रशासन सुरक्षा के ठोस इंतजाम करे।

भाईचारे की मिसाल – आदिवासी और मुस्लिम समाज साथ आए

गौर करने वाली बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में न केवल मुस्लिम समाज, बल्कि आदिवासी समाज और स्थानीय साहू समुदाय के लोग भी साथ खड़े रहे। ग्रामीणों ने कहा कि हम लोग वर्षों से मिल-जुलकर रहते आए हैं। यह घटना हमारी एकता को तोड़ने की कोशिश है, लेकिन हम किसी भी कीमत पर अपने भाईचारे को टूटने नहीं देंगे।

आदिवासी समाज के लोगों ने भी स्पष्ट कहा कि जो लोग झंडा उखाड़ने जैसी हरकत कर रहे हैं, वे असल में हमारे गांव और समाज की शांति को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। हालांकि गुस्साए लोग गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे।

पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

क्या यह राजनीतिक साजिश है?

जब ग्रामीणों से पूछा गया कि क्या यह मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और क्या इसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है? तो ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि यह हमारी स्थानीय समस्या है। इसमें हेमंत सोरेन या सरकार की कोई भूमिका नहीं है। यह सब कुछ आपसी माहौल बिगाड़ने और समाज को बांटने की कोशिश है।

माहौल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में

फिलहाल पूरे इलाके में माहौल तनावपूर्ण है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। पुलिस प्रशासन लगातार लोगों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, वे चौक से नहीं हटेंगे। वहीं प्रशासन का दावा है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

निष्कर्ष

पिथोरिया के सोसो चौक पर हुआ यह विवाद सिर्फ एक धार्मिक झंडा उखाड़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज के आपसी भाईचारे को तोड़ने की एक नाकाम कोशिश है। हालांकि यहां के लोगों ने जिस तरह से संयम और एकजुटता दिखाई है, वह काबिले-तारीफ है। अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि वह कितनी जल्दी दोषियों को पकड़कर कानून के हवाले करता है।

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