Ranchi Ramnavami 2026 (JKJ News) : झारखंड की राजधानी रांची की रामनवमी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह यहाँ की अस्मिता, संस्कृति और सामूहिक शक्ति का प्रतीक बन चुकी है। इस वर्ष का हिंदू नववर्ष और रामनवमी उत्सव कुछ ऐसा रहा जिसे दशकों तक याद रखा जाएगा। यह राँची के हर इलाकों से लेकर मेन रोड (महात्मा गांधी रोड) तक, जिधर भी नजर गई, बस भगवा ध्वज और रामभक्तों का हुजूम ही नजर आया। यह रिपोर्ट उस अद्भुत यात्रा की है, जो भक्ति के विश्वास से शुरू होकर शौर्य के प्रदर्शन तक पहुँची।
सनातनी परंपरा के अनुसार, रामनवमी का मुख्य आकर्षण वे जुलूस होते हैं जो मोहल्लों से निकलकर मुख्य मार्गों तक पहुँचते हैं। हमारी यात्रा रांची के पंडरा क्षेत्र से शुरू हुई। यहाँ स्थित महावीर मंदिर का अपना एक विशेष महत्व है।
सुबह से ही यहाँ पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया था। जैसे ही दोपहर ढली, तासा-पार्टी की थाप पर जुलूस निकलने शुरू हुए। पंडरा की गलियों में गूंजता ‘जय श्री राम’ का नारा भक्तों में एक नई ऊर्जा भर रहा था। यहाँ के साउंड सेटअप की धमक इतनी तेज थी कि लोगों के पैर खुद-ब-खुद थिरकने लगे। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई हाथ में महावीरी झंडा लिए प्रभु राम की भक्ति में लीन था।
रामभक्तों के स्वागत में उमड़ा रांची
रांची की रामनवमी की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ की ‘सेवा भावना’ है। पंडरा से जैसे ही जुलूस आगे बढ़ा, रास्ते के दोनों ओर पूजा समितियों का तांता लगा हुआ था।
खान-पान की व्यवस्था: चिलचिलाती धूप और उमस के बीच भक्तों के लिए जगह-जगह ‘भंडारे’ लगाए गए थे। कहीं ठंडी आइसक्रीम बांटी जा रही थी, तो कहीं गुड़ और भीगे हुए चने।
विशाल लंगर: कई समितियों ने पूड़ी-सब्जी, खीर और खिचड़ी की व्यवस्था की थी। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि भक्तों के प्रति सम्मान और सेवा का भाव था।
स्वागत द्वार: हर मोड़ पर डीजे सेटअप लगे थे, जहाँ से रामभक्तों का स्वागत फूलों की वर्षा और नारों के साथ किया जा रहा था।
पिस्का मोड़ में जनसैलाब ने लिया महासागर का रूप
जैसे ही हमारा जुलूस पिस्का मोड़ चौक पहुंचा, वहां का नजारा देखकर रोंगटे खड़े हो गए। यह रांची का वह बिंदु है जहाँ कई क्षेत्रों के जुलूस आकर मिलते हैं। यहाँ भीड़ इतनी अधिक थी कि सड़क पर एक कदम चलना भी दूभर हो गया था।
पिस्का मोड़ पर जो जनसैलाब दिखा, वह यह बताने के लिए काफी था कि सनातनी समाज अपने धर्म और उत्सव के लिए कितना एकजुट है। यहाँ युवाओं के जोश का कोई ठिकाना नहीं था। चारों तरफ केवल महावीरी झंडे लहरा रहे थे और साउंड सिस्टम पर बजते भजनों ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना दिया था।
तलवारबाजी, लाठीबाजी और नारी शक्ति का प्रदर्शन
रामनवमी का जुलूस केवल नाच-गाने का नाम नहीं है, यह अपनी रक्षा और शौर्य के प्रदर्शन का भी मंच है।
पारंपरिक शस्त्र कला: पिस्का मोड़ से लेकर रातू रोड तक, युवाओं ने अपनी लाठीबाजी और तलवारबाजी के हुनर दिखाए। आग के गोलों के बीच से गुजरना और तलवारों को बिजली की गति से घुमाना, दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर रहा था।
नारी शक्ति का उदय: इस बार की रामनवमी में एक सुखद बदलाव दिखा। रांची की युवतियां भी पीछे नहीं थीं। ‘झांसी की रानी’ का वेश धारण कर, सिर पर पगड़ी और हाथ में नंगी तलवार लिए जब बेटियां सड़कों पर उतरीं, तो हर किसी ने उनकी हिम्मत को सलाम किया। यह दृश्य आधुनिक भारत की सशक्त सनातनी नारी की तस्वीर पेश कर रहा था।
झांकियों का वैभव: जीवंत हुई रामायण
जैसे-जैसे जुलूस आगे बढ़ा, एक से बढ़कर एक मनमोहक झांकियां देखने को मिलीं।
राम-सीता स्वरूप: सुंदर सजे हुए रथों पर छोटे बच्चों को भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता के रूप में सजाया गया था। उनकी मासूमियत और दिव्यता ने सबका दिल जीत लिया।
हनुमान जी का विशाल रूप: जुलूस में बजरंगबली के विशालकाय स्वरूप और राक्षसों के वध वाली झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
मुद्रिका प्रसंग: सबसे भावुक करने वाली झांकी वह थी, जिसमें हनुमान जी द्वारा लंका के अशोक वाटिका में माता सीता को भगवान राम की अंगूठी (मुद्रिका) भेंट करने के दृश्य को जीवंत किया गया था।
मेन रोड (महात्मा गांधी मार्ग): सियासत और आस्था का मिलन
अपर बाजार की गलियों से होते हुए जब जुलूस रांची के हृदय स्थल मेन रोड पहुँचा, तो वहां का दृश्य अलौकिक था। यहाँ की लाइटिंग ने रात के अंधेरे को दिन की रोशनी में बदल दिया था।
मेन रोड पर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने अपने-अपने भव्य मंच लगाए थे। यहाँ राजनीति से ऊपर उठकर सभी दलों ने रामभक्तों का स्वागत किया:
भाजपा (BJP): रांची के सांसद और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ स्वयं कार्यकर्ताओं के साथ डटे हुए थे। वे हर आने वाले जुलूस का अभिनंदन कर रहे थे।
JLKM: जयराम महतो की पार्टी के कद्दावर नेता देवेंद्र नाथ महतो भी अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे, जो युवाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय नजर आए।
अन्य दल: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और अन्य स्थानीय दलों ने भी शिविर लगाकर शरबत और पानी की व्यवस्था की थी।
यह दृश्य बताता है कि प्रभु श्री राम के नाम पर झारखंड की पूरी राजनीति एक मंच पर आकर नतमस्तक हो जाती है।
अघोरी नृत्य और आध्यात्मिक ऊँचाई
मेन रोड पर स्थापित मुख्य मंचों में से एक पर अघोरी बाबाओं का समूह आकर्षण का केंद्र था। शरीर पर सफेद भभूत लपेटे, हाथ में डमरू लिए जब इन कलाकारों ने तांडव नृत्य शुरू किया, तो पूरा वातावरण शिव-शक्ति की ऊर्जा से भर गया। उनके नृत्य ने न केवल दर्शकों को बल्कि खुद रामभक्तों को भी झूमने पर मजबूर कर दिया।
प्रमुख समितियों की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में कुछ प्रमुख संस्थाओं का योगदान अतुलनीय रहा:
हिंदू महापरिवार रामनवमी पूजा समिति
चंद्रशेखर आजाद दुर्गा पूजा समिति
केंद्रीय युवा महावीर मंडल
श्रीराम वानर सेना
साथ ही, रांची जिला प्रशासन की भूमिका भी सराहनीय रही। हजारों की भीड़ को नियंत्रित करना और सीसीटीवी कैमरों व ड्रोन के जरिए सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे प्रशासन ने बखूबी निभाया।
रामनवमी सिर्फ एक त्यौहार नहीं
रांची की यह रामनवमी केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि भाईचारे, सेवा, शौर्य और अटूट विश्वास का संगम रही। जब आधी रात को जुलूस अपने गंतव्य की ओर बढ़े, तब भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ था। तासा-पार्टी की गूँज और ‘जय श्री राम’ के नारे रांची की फिजाओं में तैर रहे थे।
यह उत्सव हमें सिखाता है कि जब समाज एक सूत्र में बंधकर अपने आराध्य का स्वागत करता है, तो वहां की ऊर्जा पूरे राष्ट्र को आलोकित करती है। पंडरा से लेकर मेन रोड तक का यह सफर हर सनातनी के हृदय में हमेशा के लिए अंकित हो गया है।
लेखक की कलम से:
यदि आप इस बार रांची की रामनवमी का हिस्सा नहीं बन पाए, तो अगले वर्ष इस ऐतिहासिक पल के साक्षी जरूर बनें। यह अनुभव आपको मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति से भर देगा।
जय श्री राम!







